Saturday, 7 July 2012

Sweet memories of SDPW

Sweet memories of SDPW

यूँ   तो हमारी ज़िंदगी में ऐसे बहुत से पल आते हैं जिन्हें याद कर आपके भीतर एक नई ऊर्जा जाग्रत हो जाती है , मन ताज़ा हो जाता है, हर्ष से भर उठता है . आप खुद से ही मुस्कुराने लगते हैं और मन नाच उठता है, भाव -विभोर हो जाता है.....उन हसीन पलों को याद करके . ऐसे ही कई पल मेरी ज़िंदगी में भी आए..... जिनमें से मेरे कॉलेज SDPW, में मेरा सफर , यहाँ बिताया एक -एक पल हसीन है , मेरे दिल के करीब है......



 डिज़ाइनिंग में विधिवत शिक्षा मैंने दिल्ली के प्रख्यात  SDPW  से संपूर्ण की.......मुझे आज भी याद है वो बड़ा सा प्रवेश द्वार , जो खूबसूरत नक्काशी से सजा हुआ था परंतु था बड़ा अत्याचारी.....एक खूबसूरत जेल की तरह.......... जिससे एक बार अंदर प्रवेश कर लिया तो class schedule संपूर्ण होने के उपरांत ही बाहर जाना संभव हो पता था.




प्रवेश द्वार से कैंपस के अंदर आते ही हर ओर विभिन्न कलाकृ्तियाँ दृष्तिगोचर होती थीं........ चाहे फिर वो मधुबनी पेंटिंग्स हों या बड़े - बड़े wooden  panels  पर पारंपरिक नक्काशी..... आगे बढ़ते ही हर ओर हरियाली... हरियाली और हरियाली...... मानो एक अलग ही दुनिया में आ गए हों.
उस गेट से बाहर आते ही ...... दिल्ली की सड़कों पर ज़िंदगी दौड़ती- भागती, थकती, जीतती व हारती नज़र आती थी पर गेट के भीतर आते ही उस कलात्मक परिवेश में मन यूँ ढल जाता था कि बस मन- मस्तिष्क में एक नई ऊर्जा की लहर दौड़ जाती थी....

हे प्रभु ! वो क्लासेस ..वो ट्फ कॉम्पटिशन ....... वो सबसे बेहतर काम करने की होड़.... रचनात्मकता के उस स्तर को प्रदर्शित करने की जद्दोजेहद जहाँ औरों की सोच , रचनात्मकता व कल्पना का अंत हो वहाँ मेरी सोच, रचनात्मकता व कल्पना का प्रारंभ हो............ बेहद खूबसूरत सफर था.




 ये स्थान कैंपस के सबसे खूबसूरत स्थानों में से थे ...... जब पैरेंट्स यहाँ आते थे तो इन बड़ी- बड़ी पीतल की मूर्तियों और महीन कारीगरी को देख अचंभित हो जाते थे ...... कई बार तो लोग भ्रमित हो जाते थे कि ये मूर्तियाँ जीवंत तो नहीं जिस पर प्राय: मैं और अन्य hostellers खूब हँसते थे .
ये photos बेहद  rare हैं क्योंकि यहाँ students को फटकने नहीं दिया जाता था ताकि वे कैंपस की खूबसूरती के साथ experiments न कर बैठें. ...... अपनी wardens से बचते - छिपाते बड़ी मशक्कत से यकीन मानिये दिल में कँपन के साथ व इस डर के साथ कि कहीं अगर एक भी warden की नींद खुल गई और मुझे photos click करते देख लिया तब तो...... उफ!! अंजाम बेहद डरावना होता.... अत: सुबह के पौने पाँच बजे अपने मोबाइल से ये photos click  करीं .... इस कोशिश के साथ कि इन यादों को कहीं न कहीं कुछ हद तक समेट सकूँ......  खैर, ईश्वर को बहुत- बहुत धन्यवाद जो सारी wardens को उस दिन बहुत सुंदर नींद आई थी तभी तो मेरा कार्य पूर्ण होने तक किसी भी प्रकार का कोई विघ्न नहीं पड़ा ...... मेरी भली किस्मत.




 ये pic Mess { भोजन-कक्ष } की है........ बड़ी कहानियाँ जुड़ी हैं यहाँ से.....चाहे बात पंगो की हो या षड़यंत्रो की........ यहाँ अक्सर छुट-पुट बात- विवाद हो ही जाया करते थे .... जो बेहद हास्यास्पद होते थे.




ये pic मेरे रूम के है  { Room No. 43 } ........पीछे दिवार पर जो lips दिख रहें हैं वो मेरे द्वारा बनाए गए थे........with a special technique of art.




 ये है मेरी डिज़ाइनिंग शि़क्षा के पहले वर्ष की पहली Design sheet और इस पर की गई मेहनत से आप ये अंदाज़ तो लगा ही सकते हैं कि highest grade इस sheet में किसके होंगे ?




 A+ हमारे यहाँ का उच्चतम grade था as per the grading system of SDPW...... जो मुझे अक्सर प्राप्त होता रहता था..  { with giggle }





This is one of the pics of my first year in SDPW ...... In this pic , I am in white lucknow chickan work kurta-salvaar .....students in my class were shocked to saw me in this Avatar because at that time I usually prefered jeans - shirts..... & of course, need not to mention , that I was praised by most of my classmates & faculty. { ha ha ha ha ha }.






 This is the pic of presentation board of one of the design projects during the course ...the theme was 'Bird' & we were instructed to prepare a collection inspired by this theme.. I got a lot of appreciations from faculty .Infact,  the director mam praised me for the wonderful rendering.






        This is the pic of my honourable director mam ,Mrs. Ashima Chaudhari


 


Chain design & production के दौरान मेरे द्वारा बनायी गई पहली चेन ............. हमारे production classes की सबसे निराली व मज़ेदार बात यह थी कि यहाँ  students अपने दिमाग की सभी नसों पर इतना अधिक जोर डालते थे कि बस औरों से पहले उनका design complete हो जाए..........  हर कोई भरकस प्रयास करता था कि कितनी जल्दी उनकी कल्पनाओं में विचरने वाला डिज़ाइन कागज़/कंप्यूटर  पर प्रारूप लेने के बाद ..... बस यथार्थ में उनके हाथों में आ सके.......और  इसके लिये हर कोई एक दूसरे को पछाड़ने की होड़ में लगा रहता था........ This is the reality of design industry  जहाँ ग्लैमर की चकाचौंध के साथ गला काट कॉम्पटिशन की कोई हद नहीं..........

 


SDPW में first year में Art competition organise किया गया था .....  चूँकि Hostel में मेरे friends को पता था कि मुझे painting में रुचि है .. अत: मुझसे पूछे बगैर मेरी senior दिव्या दी ने मेरा नाम भी register करवा दिया..... competition अगले दिन ही था और मैं परेशान थी कि क्या बनाऊँ जो सबके दिल को छू जाए और जिसमें सामाजिक संदेश भी हो और जो प्रेरणादायक हो. इस उलझन में मैं अपने रूम के एक छोर से दूसरे छोर तक टहलती फिर रही थी.....तभी दिव्या दी आईं और उन्होंने मुझसे कहा कि क्यों न मैं कन्या भ्रूण हत्या पर ऐसा चित्र बनाऊँ जो लोगों को इस दुष्कर्म  को समाज से मिटा देने की प्रेरणा दे.........  मैंने उनके इस सुझाव को कागज़ पर चित्रित किया....  और हर ओर से ढेरों तारीफों की हकदार बनी ....... और चूँकि अपने department से इस  competition में मैंने ही पुरे कॉलेज में तृ्तीय स्थान प्राप्त किया तो अपने department का गौरव बढ़ाने का श्रेय भी मेरे खाते ही आया.............  {with shrewd smile}.




    

 last but not the least .....ये pics मेरे faculties की हैं ...... बहुत कुछ सीखने समझने को मिला इनसे ..... फिर चाहे वो डिज़ाइनिंग के क्षेत्र की बारीकियाँ हो , या  उनके अनुभव .....सब बेहद खूबसूरत था. कीमती था.




             
                                             SDPW में बिताया हर पल मेरे लिये खास है ,
                                                           मेरे दिल के पास है, औरों का मुझे नहीं मालूम ,
                                               पर  मेरे लिये तो हर लम्हा यादगार है,
                                                             मज़ेदार है ...........................


                                               स्वप्निल शुक्ल

 copyright©2012Swapnil Shukla.All rights reserved

16 comments:

  1. thumbs up for such a wonderful & interesting post....great pic & presentation dear....
    & yes,the campus is soooooooooooooo beautiful....

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  2. wowww...................what a nice description dear....... itna behtareen description padh kar aisaa lagtaa hai kash sdpw mein boys admissions possible hote ho main bhe yaheen se apnaee studies complete kartaa.................

    a very well written & interesting post :))

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  3. ur way of writing & expressing your views is just outstanding.......love the pics ........ & awesome presentation

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  4. very well written & presented blog.....you reminded me my college life ...thank

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  5. awesome read ...thanks for sharing such lovely experiences .....keep writing plz

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  6. spectacular presenattion .....what a lovely blog...thanks for sharing !!

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  7. Anuradha kashyap, delhi8 December 2012 at 03:57

    amazing post ..... great way of presenting your memories ..please keep blogging ...
    -Anuradha

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  8. you are undoubtedly a great designer...columnist & blogger ..its my pleasure that i found your blog ... :)
    - Shivani dutta

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  9. really nice amizing work sach mein yaad aa gayi spwd ki :) 1 -1 kone ki jaha hamne masti mari hain shatanayi ki hai :)

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  10. Swapnil, your real story is intresting...!! and the way you presented is apprecialble. Some of the pics are really eye catching like, two dears drinking water, your b'ful sparrow and last but not the least your own picture.. where you looks like a fashion diva..!!

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  11. awesome blog . great presenation ..congrats swapnil ji

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