Sunday, 8 July 2012

Sand of the eye

आवाज़ उठाना कोई गलत बात नहीं :



मारे समाज में आज महिलायें हर क्षेत्र में अपनी सफल उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं. पर फिर भी प्रोफेशनल जगत में उन्हें सेक्शुअल हैरसमेंट , जेंडर डिसक्रिमिनेशन ( लैंगिक भेदभाव ) इत्यादि जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है. प्रोफेशनल जगत के अलावा आज भी कई परिवारों में घरेलू हिंसा जैसे गंभीर अपराध हो रहे हैं . नौकरी करने के लिए सक्षम होने पर भी कई जगह ऐसी स्थितियां आती हैं जहाँ उनको नौकरी करने नहीं दी जाती  या फिर घर की ज़िम्मेदारियों के नाम पर उनको घर में रहने के लिए मजबूर किया जाता है. एक महिला के लिए नौकरी और  घर को संभालना  एक अग्निपरीक्षा सी बन जाती  है. हमारे समाज का महिलाओं के प्रति पक्षपाती व ढीला रवैया , न जाने कितनी ही महिलाओं के जीवन में तनाव उत्पन्न करता है जो 'डिप्रेशन ' का रुप ले लेता है और उन्हें व उनके जीवन को अंधकार की ओर ढकेल देता है . ऐसी स्थिति में क्या करें ? किस प्रकर खुशियों व स्वाभिमान से पूर्ण ज़िंदगी जिऎं ?..........यह एक जटिल एवं गंभीर प्रश्न है।

इस विषय की गंभीरता को समझते हुए इसे स्त्री मुद्दो व प्रश्नों पर केन्द्रित प्रख्यात व सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग्स में से एक  ' चोखेर बाली '{ Sand of the eye }पर दिनाँक 01-जुलाई -2012 को प्रकाशित किया गया....... ... जिसके लिये आदरणीय सुजाता जी को हृदय से धन्यवाद .

तो आइये जानते है कि किस प्रकार हम औरतें जीवन के पग-पग पर कठिनाईयों का सामना करतीं हैं और हर चुनौती को स्वीकार कर उसमें सफल होती हैं.............
इस  आलेख का  लिंक नीचे दिए जा रहा है , कृ्प्या लिंक पर क्लिक करें :-


http://sandoftheeye.blogspot.in/2012/07/blog-post_5241.html


                                                           स्वप्निल शुक्ल

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2 comments:

  1. http://sandoftheeye.blogspot.in/2012/07/blog-post_5241.html

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  2. i found the article in CHOKHER BALI ...& its really inspiring ..thanks a lot for sharing ..... awesome thoughts.
    -anshuman

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